in

जानकारी का बेहतर प्रसार करेगा जलवायु परिवर्तन पर वार

जलवायु परिवर्तन के खिलाफ़ लड़ाई वैश्विक है। और इस लड़ाई में हमारा सबसे बड़ा हथियार जानकारी है।जानकारी का सबसे बड़ा स्रोत मीडिया और पत्रकार बंधु हैं।इसी एहम कड़ी के महत्व को ध्यान में रखते हुए, एक उत्साहवर्धक पहल के रूप में, जलवायु परिवर्तन जैसे जटिल और तथाकथित उदासीन मुद्दे पर पत्रकारों की क्षमता संवर्धन के उद्देश्य से वैश्विक स्तर के कुछ विशेषज्ञों ने, पत्रकारों के लिये एक दिग्‍दर्शिका (गाइड) प्रकाशित की है। इसमें पर्यावरण की रिपोर्टिंग करने वाले संवाददाताओं के लिये इस बात का मार्गदर्शन प्रदान किया गया है कि वे कैसे जलवायु परिवर्तन और ताप लहर, तूफान तथा बाढ़ जैसी चरम मौसमी स्थितियों के बीच सम्‍बन्‍धजोड़ने के लिये कौन-कौन से तर्क दे सकते हैं।

ऑक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी, इम्‍पीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार की गयी और जलवायु वैज्ञानिकों के अंतर्राष्‍ट्रीय समूह वर्ल्‍ड वेदर एट्रिब्‍यूशन द्वारा प्रकाशित इस गाइड में यह स्‍पष्‍ट किया गया है कि किस तरह से एट्रिब्‍यूशन साइंस के जरिये चरम मौसमी घटनाओं को जलवायु परिवर्तन से जोड़ना सम्‍भव होता है और कैसे व कहां कुछ घटनाओं को हमेशा मानव की गतिविधियों के कारण उत्‍पन्‍न वार्मिंग से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।

हाल के समय तक, वैज्ञानिक एकल घटनाओं को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखने से परहेज करते थे। इसके बजाय वे इसी बात तक सीमित रहते थे कि कोई घटना इस तरह की चीजों को जाहिर कर सकती है और अगर प्रदूषणकारी तत्‍वों का उत्‍सर्जन और वार्मिंग इसी तरह जारी रही तो आशंका है

कि भविष्‍य में ऐसी और घटनाएं हो सकती हैं।

मगर वैज्ञानिकों ने ऐसी पद्धतियां विकसित की हैं, जिनसे संवाददाताओं को जलवायु परिवर्तन और किसी एकल चरम मौसमी घटना के बीच सम्‍बन्‍ध जोड़ने का मौका मिलता है। साथ ही यह गणना करने का अवसर भी मिलता है कि कोई घटना ग्‍लोबल वार्मिंग के कारण कितनी कम या ज्‍यादा सम्‍भावित है और कितनी ज्‍यादा या कम तीव्रता वाली है। इन एट्रिब्‍यूशन अध्‍ययनों की मदद से

वैज्ञानिकों को ऐसे बयान देने में मदद मिलती है, जैसे- ‘‘यह ताप लहर (हीटवेव) तीन डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म थी। अगर ग्‍लोबल वार्मिंग नहीं होती तो यह दुनिया इतनी गर्म नहीं होती’’, या यहां तक कि जलवायु परिवर्तन के बिना कोई घटना प्रभावी रूप से संभव नहीं होती।

यहां तक कि विशिष्‍ट एट्रिब्‍यूशन अध्‍ययन की गैर-मौजूदगी में भी पत्रकार अक्‍सर जलवायु परिवर्तन और मौसमी घटनाओं के बीच सम्‍बन्‍ध स्‍थापित कर सकते हैं। यह गाइड ऐसी हिदायतें तय करती है कि पत्रकार हीटवेव, बाढ़, चक्रवात, हिमपात, सूखा और वनों की आग के मामले में क्‍या–क्‍या कह सकते हैं।

इस दिग्‍दर्शिका में कहा गया ‘‘जलवायु परिवर्तन किसी एक घटना का कारण नहीं बन सकता, क्‍योंकि सभी मौसमी घटनाओं के कई कारण हो सकते हैं, मगर जलवायु परिवर्तन इस बात को प्रभावित करता है कि वह किसी घटना को किस हद तक सम्‍भावित और कितनी तीव्रता से प्रभावित कर सकता है।’’

इस गा‍इड के निष्‍कर्षों में यह भी शामिल है कि हर हीटवेव का सम्‍बन्‍ध अब जलवायु परिवर्तन से जोड़ा जा सकता है और भारी वर्षा तथा दुनिया के कुछ हिस्‍सों में सूखा पड़ने की घटनाएं ग्रीनहाउस गैसों के उत्‍सर्जन के कारण अधिक सामान्‍य और ज्‍यादा तीव्र हो गयी हैं। कुछ अन्‍य प्रकार की चरम मौसमी स्थितियों के साथ कुछ अन्‍य महत्‍वपूर्ण कारक भी हैं, जिनके बारे में

पत्रकारों को जलवायु परिवर्तन से सम्‍बन्‍ध जोड़ते वक्‍त ख्‍याल रखना चाहिये।

The views and opinions expressed by the writer are personal and do not necessarily reflect the official position of VOM.
This post was created with our nice and easy submission form. Create your post!

What do you think?

Written by Nishant

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Loading…

0

Comments

0 comments