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चरखा का 27वां स्थापना दिवस संपन्न

मंगलवार को दिल्ली स्थित गैर सरकारी संस्था चरखा का 27वां स्थापना दिवस वर्चुअल रुप से मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत चरखा संस्थापक संजॉय घोष, पूर्व अध्यक्ष स्व. शंकर घोष, पूर्व सीईओ, स्व. मारियो नोरहोना और उर्मुल सीमांत समिति, बीकानेर के संस्थापक तथा गर्ल्स नोट ब्राइड्स, राजस्थान के अध्यक्ष अरविंद ओझा को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ की गई।

इस अवसर पर आगा खान फाउंडेशन इंडिया की मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिन्नी साहनी ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। अपने संबोधन में टिन्नी साहनी ने संजॉय के साथ जुड़ी यादों को साझा किया। उन्होने बताया कि किस प्रकार संजॉय ने करियर के शुरुआती चरणों में उनका मार्गदर्शन किया था। उन्होंने बताया कि संजॉय हमेशा देश के दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की कठिनाइयों को लिखा करते थे। टिन्नी ने कहा कि सबसे पहले चरखा ने लेखन के माध्यम से गांव व शहर के लोगों की बीच की दूरी को कम करने का प्रयास किया है। कोविड-19 महामारी के दौरान चरखा के लेखन कार्य की सराहना करते हुए, टिन्नी साहनी ने कहा की इस मुश्किल समय में भी चरखा अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहा और आलेख के माध्यम से सामाजिक मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहा।

कार्यक्रम में दो ई-पुस्तकों- अभिव्यंजना- युवा लड़कियों की कलम से और इम्पैक्ट- स्पिंनिग एक्शन इनटू वर्ड्स’ का विमोचन हुआ। 

‘अभिव्यंजना- युवा लड़कियों की कलम से’ राजस्थान के अजमेर स्थित 28 ग्रामीण किशोरियों और महिलाओं द्वारा लिखे गए लेखों का संकलन है, जो चरखा कार्यशाला की प्रतिभागी थी। इस ई-बुक में बाल-विवाह, लड़कियो की शिक्षा, मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन और महिला सशक्तिकरण सहित विभिन्न सामाजिक मुद्दो पर लेख संग्रहित किए गए है। इसका विमोचन महिला जन अधिकार समिति, राजस्थान की संस्थापक सदस्य और सचिव इंदिरा पंचोली द्वारा किया गया। इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने समाज के प्रति संजॉय के कार्यों को याद करते हुए कहा कि उनका सम्पूर्ण जीवन आज भी विकास के क्षेत्र में लोगों का मार्गदर्शन करता है। उन्होने डेटा संचालित और साक्ष्य आधारित लेखों की आवश्यकता पर बल दिया और लड़कियों के सशक्तिकरण तथा उनके मौलिक अधिकार को समझने में पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

दूसरी पुस्तक ‘इम्पैक्ट- स्पिंनिग एक्शन इनटू वर्ड्स का विमोचन पुंछ, जम्मू के सेवानिवृत अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त सैयद अनवर हुसैन शाह ने किया। इस पुस्तक में जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार के चरखा के ग्रामीण लेखन की यात्रा को दर्शाया गया है जिसमें लेखकों ने अपने लेखन के माध्यम से क्षेत्र में बदलाव को संभव बनाया है। इस अवसर पर सैयद अनवर हुसैन शाह ने अपने संबोधन में सीमावर्ती जिला पुंछ में चरखा की प्रभावी उपस्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि चरखा द्वारा प्रशिक्षित 300 से अधिक लेखक है जिन्होनें विकास की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए 1500 से अधिक लेख लिखे है। उन्होने अपने प्रशासनिक अनुभव को साझा करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में शिक्षित युवा है जो विभिन्न कार्यशालाओं के माध्यम से चरखा के साथ मिलकर काम कर सकते है। उन्होंने सुझाव दिया की व्यापक जागरूकता अभियानो के माध्यम से चरखा विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

इस अवसर पर चरखा के स्वयंसेवी प्रशिक्षकों को ई-प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इससे पूर्व चरखा द्वारा एक लघु फिल्म प्रस्तुत की गई जिसमें पुंछ, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार में स्वयंसेवी प्रशिक्षकों के काम की यात्रा को दर्शाया गया। इस अवसर पर वर्चुअल समारोह में चरखा की सचिव उषा राय ने प्रशिक्षकों को लेखन के माध्यम से समाज में बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए बधाई दी। समारोह में चरखा की प्रबंधक- कार्यक्रम और संम्पादकीय चेतना वर्मा ने का धन्यवाद करते हुए ई-बुक में लेख लिखने वाली सभी 28 लड़कियों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में उनके सभी प्रयासों में चरखा उनके साथ खड़ा है। चेतना वर्मा ने 27 साल की यात्रा में चरखा का सहयोग और समर्थन करने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।

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